चारधाम यात्रा 2026 : ‘पंचगव्य’ और ‘नो-एंट्री’ पर मचा घमासान, आस्था के बहाने गैर-सनातनियों पर रोक की तैयारी
दिनांक : 2026-03-22 00:27:00
Chardham Yatra 2026 controversy : अप्रैल से शुरू होने जा रही चारधाम यात्रा को लेकर इस बार उत्तराखंड का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। यात्रा शुरू होने में अभी वक्त है, लेकिन उससे पहले ही ‘पंचगव्य’ का आचमन और ‘गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक’ जैसे मुद्दों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जहां मंदिर समितियां इसे परंपरा की रक्षा बता रही हैं, वहीं विपक्ष ने इसे पर्यटन को नुकसान पहुंचाने वाली ‘सियासत’ करार दिया है।
गंगोत्री धाम में ‘पंचगव्य’ अनिवार्य करने की तैयारी
विवाद की शुरुआत गंगोत्री धाम से हुई है। श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति ने प्रस्ताव रखा है कि भक्तों को दर्शन से पहले पंचगव्य (गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का मिश्रण) का आचमन करना अनिवार्य किया जाए। समिति का कहना है कि इसके कानूनी पहलुओं की जांच के लिए एक कमेटी बना दी गई है। वहीं, बदरी-केदार मंदिर समिति भी अपने स्टैंड पर कायम है, जहां गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक और शपथ पत्र की व्यवस्था लागू करने की बात कही जा रही है।
आमने-सामने बीजेपी और कांग्रेस
इस मुद्दे पर राज्य की दोनों बड़ी पार्टियां आमने-सामने हैं. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए धर्म का सहारा ले रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि ऐसे ‘अर्गल’ बयानों से उत्तराखंड के पर्यटन और तीर्थाटन पर बुरा असर पड़ेगा और श्रद्धालुओं के मन में डर पैदा होगा। दूसरी तरफ, बीजेपी का कहना है कि यह फैसला सरकार का नहीं बल्कि तीर्थ पुरोहितों का है। बीजेपी के मुताबिक, गंगाजल या पंचगव्य का आचमन हमारी पुरानी सनातनी परंपरा है, और अगर पुरोहित इसे लागू करना चाहते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
पर्यटन कारोबारियों की बढ़ी धड़कनें
आस्था और राजनीति की इस लड़ाई ने उत्तराखंड के पर्यटन कारोबारियों को चिंता में डाल दिया है। कारोबारियों का मानना है कि चारधाम यात्रा लाखों लोगों की आजीविका का जरिया है। ऐसे में प्रवेश को लेकर विवाद और धार्मिक ध्रुवीकरण की बातें यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम कर सकती हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होने की आशंका है।


