भारत को इलेक्ट्रिक कार निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की तैयारी, राज्यसभा में सांसद डॉ. नरेश बंसल ने उठाया मुद्दा
दिनांक : 2026-07-28 20:13:00
- इलेक्ट्रिक यात्री कार विनिर्माण योजना पर सरकार से पूछा निवेश, स्थानीयकरण और रोजगार का खाका; केंद्र ने बताया—₹4,150 करोड़ न्यूनतम निवेश और 50% घरेलू मूल्य संवर्धन अनिवार्य
देहरादून : भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने राज्यसभा में अतारांकित प्रश्न संख्या-739 के माध्यम से भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई योजना (SPMEPCI) के उद्देश्य, निवेश, स्थानीयकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रोजगार सृजन को लेकर केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। इसके उत्तर में केंद्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने सरकार की नीति और योजना के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी सदन में दी।
सांसद ने सरकार से पूछे चार महत्वपूर्ण सवाल
डॉ. नरेश बंसल ने अपने प्रश्न में सरकार से जानना चाहा कि भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं, निवेश आकर्षित करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए इसमें क्या प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा उन्होंने स्थानीयकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, प्रस्तावित निवेश, विनिर्माण क्षमता, रोजगार सृजन तथा योजना के क्रियान्वयन तंत्र से संबंधित जानकारी भी मांगी।
सरकार ने बताई योजना की प्रमुख विशेषताएं
केंद्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने बताया कि भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण को प्रोत्साहित करने की योजना 15 मार्च 2024 को अधिसूचित की गई थी। इसका उद्देश्य वैश्विक इलेक्ट्रिक कार निर्माताओं से निवेश आकर्षित करना, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना तथा भारत को इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाना है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अनुमोदित कंपनियों को भारत में इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहनों की विनिर्माण इकाई स्थापित करनी होगी तथा न्यूनतम ₹4,150 करोड़ का निवेश करना अनिवार्य होगा।
स्थानीयकरण पर विशेष जोर
सरकार ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय मूल्य संवर्धन का लक्ष्य तय किया गया है। इसके अनुसार, अनुमोदन की तिथि से तीसरे वर्ष तक 25 प्रतिशत और पांचवें वर्ष तक 50 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
योजना के लिए जारी किए गए विस्तृत दिशा-निर्देश
मंत्री ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 2 जून 2025 को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। योजना की स्वीकृति, समग्र निगरानी और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी एक अंतर-मंत्रालयी स्कीम स्वीकृति समिति को सौंपी गई है, जो योजना के सभी पहलुओं की निगरानी करेगी।
अब तक नहीं मिला कोई आवेदन
सरकार ने सदन को यह भी जानकारी दी कि इलेक्ट्रिक यात्री कार विनिर्माण को प्रोत्साहित करने वाली इस योजना के अंतर्गत अब तक किसी भी कंपनी द्वारा आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसे में प्रस्तावित निवेश, विनिर्माण क्षमता और रोजगार सृजन की प्रक्रिया अभी प्रारंभ नहीं हो सकी है।
भारत को वैश्विक ईवी हब बनाने की दिशा में पहल
केंद्र सरकार का मानना है कि यह योजना भविष्य में वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करेगी। इससे देश में अत्याधुनिक तकनीक का हस्तांतरण, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा, रोजगार के नए अवसर और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
