मूसलाधार बारिश से ज्योतिर्मठ के किमाणा गांव में घुसा मलबा, दो परिवार सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट

मूसलाधार बारिश से ज्योतिर्मठ के किमाणा गांव में घुसा मलबा, दो परिवार सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट

दिनांक : 2026-07-30 15:45:00

चमोली। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते ज्योतिर्मठ विकासखंड के किमाणा गांव में एक बार फिर भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। गांव के ऊपर स्थित पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पानी का तेज बहाव आबादी क्षेत्र में पहुंच गया, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मलबा और पानी के बहाव से गांव के संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि खेतों में खड़ी फसलों को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र से दो परिवारों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है। प्रशासन की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया जा रहा है।

आपदा राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

इस बीच गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने मानसून और आपदा राहत कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी जिलाधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भूस्खलन और अतिवृष्टि से अवरुद्ध सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोला जाए, ताकि राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

मंडलायुक्त ने निर्देश दिए कि आपदा से सरकारी और निजी संपत्तियों को हुए नुकसान का तत्काल आकलन किया जाए तथा जान-माल की क्षति होने पर प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता राशि समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने सभी विभागों को 24 घंटे अलर्ट मोड में रहने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने गाड़-गदेरों और नदी किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए तथा उनके भोजन, आवास और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की जाए। साथ ही मैदानी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से बचाव के लिए नालियों और जल निकासी व्यवस्था की नियमित निगरानी के निर्देश भी दिए।

मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए मंडलायुक्त ने चारधाम यात्रा से जुड़े अधिकारियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर यात्रा को अस्थायी रूप से रोककर यात्रियों को सुरक्षित पड़ावों पर ठहराया जाए।

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