धर्मपुर के प्राचीन शिव मंदिर में शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर आचार्य सुभाष जोशी ने बताया – गृहस्थ आश्रम सभी आश्रमों में श्रेष्ठ एवं साधना का सर्वोत्तम मार्ग
दिनांक : 2026-08-06 01:34:00
देहरादून : धर्मपुर चौक स्थित सिद्धपीठ प्राचीन श्री शिव मंदिर में श्रावण मास के अवसर पर आयोजित दिव्य एवं भव्य संगीतमय श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान महायज्ञ के चतुर्थ दिवस पर कथा व्यास एवं शिव आराधक आचार्य सुभाष जोशी ने श्रद्धालुओं को गृहस्थ जीवन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गृहस्थ आश्रम सभी आश्रमों में सर्वश्रेष्ठ, पवित्र एवं साधना का सबसे सुंदर मार्ग है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव और माता पार्वती के आदर्श जीवन से प्रत्येक परिवार को प्रेम, समर्पण, मर्यादा और जिम्मेदारी का संदेश मिलता है।
आचार्य सुभाष जोशी ने अपने प्रवचन में बताया कि श्री शिव महापुराण में भगवान शिव और माता पार्वती के संवाद के माध्यम से गृहस्थ जीवन को धर्म, कर्तव्य और आध्यात्मिक उन्नति का आधार बताया गया है। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी को एक-दूसरे के विचारों, भावनाओं और स्वतंत्र अस्तित्व का सम्मान करते हुए प्रेम एवं विश्वास के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव का परिवार इस बात का सर्वोत्तम उदाहरण है कि भिन्न स्वभाव होने के बावजूद परिवार में प्रेम, सामंजस्य और एकता बनाए रखी जा सकती है। भगवान शिव का वाहन नंदी (बैल) तथा माता पार्वती का वाहन सिंह है, जो स्वभाव से एक-दूसरे के विरोधी माने जाते हैं, फिर भी शिव परिवार में पूर्ण सामंजस्य और प्रेम विद्यमान है। यही संदेश प्रत्येक परिवार के लिए प्रेरणास्रोत है।
कथा के दौरान आचार्य ने कहा कि गृहस्थ व्यक्ति को अपने परिवार, आजीविका और सामाजिक दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करना चाहिए। भगवान शिव स्वयं वैराग्य के प्रतीक होते हुए भी गृहस्थ रूप में सादगी, संतोष और कर्तव्यनिष्ठ जीवन का संदेश देते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में दिखावे और धन के अहंकार से दूर रहकर सरल एवं संतुलित जीवन अपनाएं।
आचार्य सुभाष जोशी ने बताया कि श्री शिव महापुराण के अनुसार गृहस्थ को घर-बार त्यागने अथवा कठोर तपस्या करने की आवश्यकता नहीं है। परिवार में रहते हुए प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल भगवान शिव का स्मरण, पूजन तथा शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक एक लोटा जल अर्पित करना ही जीवन के अनेक संकटों को दूर करने का सरल एवं प्रभावी उपाय है। उन्होंने कहा कि जीवन में दुख, कष्ट अथवा विपरीत परिस्थितियां आने पर धैर्य नहीं खोना चाहिए। भगवान शिव की कृपा से जुड़ा परिवार हर कठिनाई का साहसपूर्वक सामना कर सकता है।
पर्यावरण संवर्धन पर चल रही कथा में अध्यक्ष सीताराम भट्ट ने सभी भक्तों को मंदिर में पालीथीन पूर्णतः प्रतिबंधित करने पर जोर दिया। आज की कथा के यजमान मदन हुरला, अशोक सूदी, पृथ्वीराज मुयाल, विवेक कपूर, मंजू शर्मा एवं अर्चना ठाकुर रहे। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था मुनीन्द्र बलूनी, सोमवार कीर्तन मंडली एवं शिवभक्तों के सहयोग से की गई।
इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष सीताराम भट्ट, देवेन्द्र अग्रवाल, दीपक शर्मा, आत्माराम शर्मा, मदन हुरला, जयप्रकाश बंसल, अशोक सूदी, सुनील कौशिक, संदीप कुमार, प्रमोद शर्मा, सुदेश हुरला, श्रीमती अर्चना ठाकुर, शर्मिला भट्ट, संगीता खन्ना, अन्नू, मंजू सहित मंदिर समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने शिव महापुराण कथा का श्रवण कर पुण्यार्जन प्राप्त किया।

