ज्योतिर्मठ के अस्तित्व को बचाने की बड़ी जंग : 8 सेक्टरों में चल रहे युद्धस्तर पर भू-स्तरीकरण के कार्य
दिनांक : 2026-08-08 02:35:00
ज्योतिर्मठ : भू-धंसाव और आपदा के बाद से सुर्खियों में आए ऐतिहासिक शहर ज्योतिर्मठ को बचाने के लिए इन दिनों सुरक्षात्मक कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। हालांकि, इन कार्यों की गति और गुणवत्ता को लेकर स्थानीय स्तर पर जहां कुछ गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, वहीं कार्यदाई संस्था और प्रशासन का दावा है कि ये तमाम प्रयास शहर के अस्तित्व को बचाने के लिए बेहद अनिवार्य और निर्णायक हैं। वर्तमान में ज्योतिर्मठ को 8 अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर भू-स्तरीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसकी जिम्मेदारी ‘अरुण कंस्ट्रक्शन’ के पास है।
लोकेशन 10 और 12 समेत सभी क्षेत्रों में प्रगति पर काम
प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, लोकेशन नंबर 10 और लोकेशन नंबर 12 सहित सभी चिन्हित स्थानों पर कार्य निरंतर प्रगति पर है। भू-भाग को मजबूती देने के लिए इस पूरे प्रोजेक्ट में पाइलिंग और केबल एंकरिंग का सहारा लिया जा रहा है। ड्रिलिंग या बोरिंग के बाद उसके भीतर भारी मात्रा में सीमेंट का गाढ़ा घोल भरा जा रहा है, ताकि जमीन के भीतर की कमजोर परतों को ठोस मजबूती मिल सके।
एक ही पाइल में खप रहे हैं 50 से 100 सीमेंट के बैग
क्षेत्र में भू-गर्भीय स्थितियां कितनी गंभीर और चुनौतीपूर्ण हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सामान्य तौर पर जहां एक फाइल के भीतर 50 से 60 सीमेंट के बैग लग रहे हैं, वहीं कुछ अत्यधिक संवेदनशील और खतरनाक जगहों पर यह आंकड़ा 100 बैग प्रति पाइल तक पहुंच रहा है।
अकेले लोकेशन नंबर 12 की बात करें तो, वर्ष 2023 की आपदा के दौरान जो खतरनाक दरारें फट गई थीं, उन्हें पाटने और जमीन को स्थिर करने के लिए अब तक 22,000 से 23,000 सीमेंट के बैग जमीन के भीतर भरे जा चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ गांधीनगर वार्ड में हालात कुछ इसी प्रकार के हैं यहां भी पाइलिंग के दौरान प्रतीक पाइप के अंदर लगभग 25 से 30 मी भीतर तक सीमेंट का गोल डाला जा रहा है किसी-किसी स्थान पर 100 से अधिक बैग सीमेंट के खप रहे हैं……….
30 मीटर गहरी सरिया और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
प्रोजेक्ट के साइट इंचार्ज संजय शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि पूरे क्षेत्र को दीर्घकालिक मजबूती देने के लिए गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा रहा है। गहरी सरिया पाइलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसके भीतर लगभग 30 मीटर की गहराई तक मजबूत सरिया (स्टील रॉड) डाली जा रही है, ताकि मिट्टी और चट्टानों की पकड़ आपस में बनी रहे। ज्योतिर्मठ नगर क्षेत्र के विभिन्न ढलानों और वार्डों में मौजूद बड़े-बड़े खतरनाक पत्थरों को भी एंकरिंग के जरिए सुरक्षित किया जा रहा है।
गौरतलब है की सुरक्षात्मक कार्यों को लेकर लगातार लोग सवाल खड़े कर रहे हैं लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ होने चाहिए तो वहीं दूसरी तरफ निर्माण कर रही एजेंसी का दावा है कि जो सीमेंट में सभी का गुणवत्ता के साथ हो रहे हैं
