श्रद्धा सम्मान 2026 में दिवंगत लोक कलाकारों के परिजनों का सम्मान, लोक संस्कृति के संरक्षण और लोक कलाकारों को गांवों में रोजगार देने पर हुआ मंथन
दिनांक : 2026-10-04 01:17:00
देहरादून। ‘आवाज सुनो पहाड़ों की’ मंच द्वारा आयोजित श्रद्धा सम्मान लोकपितृ स्मरण समारोह-2026 के दूसरे दिन उत्तराखंड के दिवंगत लोक कलाकारों के परिजनों को सम्मानित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह आयोजन लोक कलाकारों की सामूहिक स्मृति और सम्मान को समर्पित विशिष्ट आयोजनों में से एक है, जिसमें एक साथ उन लोक कलाकारों को याद किया जाता है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक कला और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित किया।
‘आवाज सुनो पहाड़ों की’ मंच द्वारा पिछले तीन वर्षों से आयोजित किए जा रहे इस समारोह का उद्देश्य दिवंगत कलाकारों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उनके परिजनों को यह एहसास कराना है कि उनके प्रियजन भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनकी कला, संस्कृति के प्रति समर्पण और योगदान आज भी लोगों के दिलों में जीवित है।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित चर्चा में कैबिनेट मंत्री भारत सिंह चौधरी, हरिद्वार लोकसभा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, लोक गायक संतोष खेतवाल, जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण, वरिष्ठ लोक गायक वीरेंद्र डंगवाल, लोक गायिका हेमा करासी सहित प्रदेश के अनेक वरिष्ठ एवं युवा लोक कलाकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोक कलाकार भी उपस्थित रहे।
गांवों में ही लोक कलाकारों को मिले रोजगार के अवसर
कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि लोक संस्कृति केवल मंचीय प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी वास्तविक जड़ें उत्तराखंड के गांवों में हैं। पलायन के कारण गांवों से लोक परंपराओं और लोक कलाकारों का जुड़ाव लगातार कमजोर हो रहा है।
चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ग्राम एवं ब्लॉक स्तर पर लोक कलाकारों के लिए रोजगार और प्रस्तुति के नियमित अवसर विकसित किए जाएं, ताकि कलाकार अपनी कला के माध्यम से आजीविका प्राप्त कर सकें और रोजगार की तलाश में उन्हें अपने गांव छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े।
मंच की ओर से कहा गया कि यदि लोक कलाकारों को स्थानीय स्तर पर नियमित अवसर और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराया जाए, तो इससे पलायन को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही उत्तराखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति भी अपनी मूल जड़ों के साथ संरक्षित रह सकेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित कलाकारों और अतिथियों ने ‘आवाज सुनो पहाड़ों की’ की इस मुहिम का समर्थन करते हुए लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
भावुक रहा दिवंगत कलाकारों के परिजनों का सम्मान
समारोह के दौरान दिवंगत लोक कलाकारों के परिजनों का सम्मान भावुक क्षण रहा। परिजनों को सम्मानित करते समय उपस्थित कलाकारों और दर्शकों ने अपने-अपने क्षेत्र के लोकपितरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान लोक गीतों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम के वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
कल होगा समारोह का अंतिम दिन
श्रद्धा सम्मान लोकपितृ स्मरण समारोह-2026 का कल अंतिम दिन होगा। कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक आयोजित किया जाएगा। अंतिम दिन भी लोक संस्कृति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और लोक गीतों की प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा।

