भाजपा ने दिनेश आर्य को बनाया राज्यसभा प्रत्याशी, दलित समीकरण साधने की कोशिश
दिनांक : 2026-10-05 00:35:00
नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड में रिक्त हो रही राज्यसभा सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी ने दिनेश आर्य को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। भाजपा हाईकमान ने रविवार को उनके नाम की आधिकारिक घोषणा की। आर्य के नाम की घोषणा के साथ ही उत्तराखंड की सियासत में चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है।
दिनेश आर्य लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं और नैनीताल जिले में संगठन की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह भाजपा के नैनीताल जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष के पद पर हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नैनीताल विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट के लिए दावेदारी भी की थी। इससे पहले वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
दलित चेहरे को आगे कर भाजपा का सियासी संदेश
दिनेश आर्य अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं। ऐसे समय में जब प्रदेश की राजनीति में दलित प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज है, भाजपा द्वारा आर्य को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाए जाने को महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम माना जा रहा है।
विशेषकर हल्द्वानी के हालिया ‘शुद्धिकरण’ प्रकरण के बाद भाजपा पर विपक्ष की ओर से दलित विरोधी होने के आरोप लगाए गए थे। ऐसे राजनीतिक माहौल में अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले नेता को राज्यसभा प्रत्याशी बनाना पार्टी की ओर से सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
25 नवंबर को खत्म हो रहा नरेश बंसल का कार्यकाल
उत्तराखंड से वर्तमान राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इसी रिक्त होने वाली सीट के लिए भाजपा ने दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाया है।
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। मतदान की स्थिति में 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और शाम 5 बजे के बाद मतगणना की जाएगी।
निर्विरोध निर्वाचन की संभावना
राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी दिनेश आर्य का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के चुनाव मैदान में उतरने की संभावना कम बताई जा रही है। यदि कोई अन्य प्रत्याशी मैदान में नहीं आता है तो आर्य बिना मतदान के राज्यसभा पहुंच जाएंगे।
भाजपा के इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन, सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यसभा प्रत्याशी के रूप में दिनेश आर्य का चयन उत्तराखंड की राजनीति में पार्टी की आगामी रणनीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
