यूकॉस्ट देहरादून में 25–26 अक्टूबर को आयोजित होगा 21वां उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन – प्रो. दुर्गेश पंत
दिनांक : 2026-10-23 20:08:00
देहरादून : प्रो. दुर्गेश पंत, महानिदेशक, यूकॉस्ट ने बताया कि उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा 25 एवं 26 अक्टूबर, 2026 को विज्ञान धाम, यूकॉस्ट, देहरादून में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा द्वारा किया जाएगा।
दो दिवसीय इस सम्मेलन में शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, नवाचारकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्यमियों तथा अन्य संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों के सम्मिलित होने की संभावना है। सम्मेलन का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास, तकनीकी प्रगति तथा क्षेत्रीय और राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान में उनकी उपयोगिता पर विचार-विमर्श करना है। इस आयोजन में 1,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन उत्तराखंड में वैज्ञानिक संवाद, विभिन्न विषयों के बीच सहयोग तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।
सम्मेलन के अंतर्गत 13 तकनीकी प्रभागों में 260 से अधिक शोध-पत्रों के प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इन प्रभागों में कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान एवं वानिकी; जैव प्रौद्योगिकी, जैव रसायन एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान; रासायनिक विज्ञान; भू-विज्ञान, जिसमें भूविज्ञान, भू-आकृति विज्ञान, भूभौतिकी, हिमनद विज्ञान एवं भूगोल शामिल हैं; इंजीनियरिंग विज्ञान, पदार्थ विज्ञान एवं नैनो प्रौद्योगिकी; गृह विज्ञान, स्वास्थ्य एवं पोषण; गणित एवं सांख्यिकी; कंप्यूटर विज्ञान एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ; चिकित्सा एवं औषध विज्ञान; भौतिक विज्ञान; ग्रामीण विज्ञान एवं विज्ञान और समाज; प्राणी विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन तथा वर्ष का सर्वश्रेष्ठ नवाचारकर्ता (Innovator of the Year) श्रेणी शामिल हैं। सम्मेलन में शोध निष्कर्षों की प्रस्तुति एवं चर्चा, विशेषज्ञों और युवा शोधकर्ताओं के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान तथा सतत विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जाएगा। विशेष रूप से उभरती प्रौद्योगिकियों, अंतर्विषयक अनुसंधान, नवाचार-आधारित विकास तथा हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों एवं संभावनाओं के समाधान में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर दिया जाएगा।
सम्मेलन के दौरान विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और अन्य संबंधित पक्षों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से विभिन्न मंथन सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इन सत्रों के प्रमुख विषय निम्नलिखित हैं: विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (STI) नीति – विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से हिमालयी क्षेत्र में आपदा-सहिष्णुता को सुदृढ़ करना, साइबर-फिजिकल सिस्टम, STEM एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता: वर्तमान स्थिति, उभरते रुझान एवं भविष्य की संभावनाएँ, विज्ञान एवं आध्यात्मिकता: वैज्ञानिक जिज्ञासा, चेतना एवं मानवीय कल्याण के बीच समन्वय की संभावनाएँ, STI नीति 2026 के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अवसरों को व्यापक स्तर पर सामने लाने में विज्ञान संचार एवं मीडिया की भूमिका, STEM के लिए SHE: विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार में महिलाओं की भूमिका, उत्तराखंड में अनुसंधान एवं विकास (R&D) की स्थिति एवं संभावनाएँ, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियाँ एवं नैतिकता, हिमालय के सतत विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका: उत्तराखंड पर विशेष ध्यान। इन मंथन सत्रों का उद्देश्य नीतिगत संवाद को बढ़ावा देना, वैज्ञानिक संस्थानों एवं सरकारी तंत्र के बीच सहयोग को मजबूत करना तथा क्षेत्रीय विकास, आपदा-सहिष्णुता, तकनीकी प्रगति और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए व्यावहारिक उपायों पर विचार करना है। सम्मेलन के पहले दिन, 25 अक्टूबर, 2026 को विज्ञान संचार एवं विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) नीति पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों तथा प्रख्यात पत्रकारों की सहभागिता रहेगी। सत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, जनसंचार और नीतिगत निर्माण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसमें वैज्ञानिक उपलब्धियों एवं नवीनतम अनुसंधान को आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, अनुसंधान एवं नवाचार को व्यापक पहचान दिलाने तथा वैज्ञानिक संस्थानों और समाज के बीच संवाद को मजबूत करने में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, प्रभावी विज्ञान संचार की रणनीतियों तथा उत्तराखंड में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में मीडिया के योगदान पर भी विचार किया जाएगा। सम्मेलन के अंतर्गत द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग का भी आयोजन किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से प्रतिभागियों के बीच विज्ञान के प्रति रुचि, सहभागिता और वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रति उत्साह को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके साथ ही लैब ऑन व्हील्स (Lab on Wheels) अभिमुखीकरण कार्यक्रम भी सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य व्यावहारिक एवं अनुभवात्मक विज्ञान शिक्षा के महत्व को रेखांकित करना तथा विद्यार्थियों और समुदायों तक विज्ञान संबंधी सीखने के अवसरों की पहुँच बढ़ाने की दिशा में जागरूकता विकसित करना है। सम्मेलन के दौरान विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों, शिक्षण संस्थानों तथा स्टार्टअप्स द्वारा प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान पहलों, तकनीकी नवाचारों, उभरते समाधानों तथा उद्यमशीलता से संबंधित प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रदर्शनी प्रतिभागी संस्थानों और नवाचारकर्ताओं को अपने कार्यों एवं उपलब्धियों को प्रस्तुत करने, विचारों का आदान-प्रदान करने, संभावित सहयोग के अवसर तलाशने तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगी। इसके माध्यम से अनुसंधान एवं नवाचार को शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक आवश्यकताओं से जोड़ने में भी सहायता मिलेगी। 21वां उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन राज्य के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होने की उम्मीद है। यह सम्मेलन अनुसंधान, शिक्षा, शासन, उद्योग, मीडिया और नवाचार के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हितधारकों को एक साझा मंच पर लाएगा। तकनीकी सत्रों, विषयगत चर्चाओं, संवादात्मक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के माध्यम से युवा शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने, विभिन्न विषयों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक समाधानों में परिवर्तित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
यह आयोजन हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान, सतत विकास को गति देने तथा विकसित भारत और प्रगतिशील उत्तराखंड के व्यापक दृष्टिकोण को साकारj करने में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार की महत्ता को भी रेखांकित करेगा। 1,000 से अधिक प्रतिभागियों की संभावित सहभागिता और 260 से अधिक शोध-पत्रों की प्रस्तुति के साथ यह दो दिवसीय सम्मेलन वैज्ञानिक योगदानों को पहचान दिलाने, नवीन विचारों को प्रोत्साहित करने तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत संस्थानों और व्यक्तियों के बीच सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।
