गोबर से संवर रही ग्रामीण महिलाओं की तकदीर, चमराड़ा की 450 महिलाएं बना रहीं धूप, हवन कप और सजावटी उत्पाद

गोबर से संवर रही ग्रामीण महिलाओं की तकदीर, चमराड़ा की 450 महिलाएं बना रहीं धूप, हवन कप और सजावटी उत्पाद

दिनांक : 2026-11-08 01:24:00

  • भूमि स्वायत्त सहकारिता से जुड़ी महिलाओं ने खड़ा किया अनूठा कारोबार, अब तक सात लाख रुपये का व्यवसाय; दीपावली पर उत्पादों की मांग में तेजी

पौड़ी। ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, हुनर और सामूहिक प्रयास ने गाय के गोबर को कमाई का नया जरिया बना दिया है। विकासखंड खिर्सू के चमराड़ा में ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से भूमि स्वायत्त सहकारिता से जुड़ी महिलाएं गोबर से धूप, हवन कप, दीपक और देवी-देवताओं की मूर्तियां तैयार कर रही हैं। पारंपरिक संसाधनों को उपयोगी और आकर्षक उत्पादों में बदलकर महिलाएं न केवल अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई संभावनाएं पैदा कर रही हैं। चमराड़ा क्लस्टर के 25 गांवों के 15 ग्राम संगठनों से जुड़ी 450 महिलाएं इस पहल का हिस्सा हैं। अब तक इस उद्यम के माध्यम से करीब सात लाख रुपये का कारोबार किया जा चुका है।

20 रुपये किलो खरीदा जा रहा गोबर, महिलाओं को घर बैठे अतिरिक्त आमदनी

भूमि स्वायत्त सहकारिता, न्याय पंचायत चमराड़ा के बिजनेस प्रमोटर दीपक शाह ने बताया कि सहकारिता की ओर से ग्रामीण महिलाओं से 20 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदा जा रहा है। इससे महिलाओं को घर के आसपास उपलब्ध संसाधन से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। इकाई की स्थापना के बाद से अब तक लगभग सात लाख रुपये का कारोबार हो चुका है। उत्पाद निर्माण और विपणन गतिविधियों के माध्यम से कुछ महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी उपलब्ध कराया गया है।

नौ लाख रुपये के वित्तीय सहयोग से बढ़ा उद्यम

ग्रामोत्थान परियोजना ने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए छह लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई है। इसके अतिरिक्त फेडरेशन ने तीन लाख रुपये का बैंक ऋण लेकर उद्यम को मजबूती दी है। इस वित्तीय सहयोग से उत्पाद निर्माण, विपणन और कारोबार के विस्तार को गति मिली है। महिलाओं को सामूहिक रूप से काम करने के साथ अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।

पौड़ी से देहरादून तक पहुंच रहे उत्पाद, 1.41 लाख के मिले नए ऑर्डर

चमराड़ा में तैयार उत्पाद पौड़ी, श्रीनगर, कोटद्वार, देहरादून और हरिद्वार सहित विभिन्न शहरों में पहुंच रहे हैं। दीपावली के अवसर पर धूप, हवन कप और दीपकों की मांग में विशेष बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में विभिन्न संस्थानों और विक्रय केंद्रों से कुल 1.41 लाख रुपये के उत्पादों की मांग प्राप्त हुई है। इनमें श्रीनगर, कृष्णायन गौ सेवा संस्थान हरिद्वार, अंजलि स्टोर श्रीनगर, कीर्तिनगर ब्लॉक एनआरएलएम, हिलांस आउटलेट, क्वालिटी बास्केट श्रीकोट और नाबार्ड आधार सेंटर हिंडोला खाल शामिल हैं।

स्थानीय संसाधनों से स्थायी आजीविका तैयार करना उद्देश्य

ग्रामोत्थान परियोजना के प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय संसाधनों के उपयोग से स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना और उनके उत्पादों को बाजार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। चमराड़ा की महिलाएं सामूहिक प्रयासों से गोबर जैसे पारंपरिक संसाधन को उपयोगी उत्पादों में बदलकर ग्रामीण उद्यमिता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। परियोजना के माध्यम से उत्पाद निर्माण और विपणन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ उनकी आत्मनिर्भरता भी मजबूत हो रही है।

चमराड़ा की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थानीय संसाधनों की उपयोगिता और महिला समूहों की सामूहिक शक्ति को दर्शाती है। गोबर से तैयार उत्पादों को मिल रही बाजार की मांग ने महिलाओं के सामने स्वरोजगार का नया रास्ता खोला है। संस्थागत सहयोग, बेहतर विपणन और सामूहिक उद्यम के माध्यम से ये महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

Admin