भगवानपुर में वन विभाग की छापेमारी, फैक्ट्री से 14900 किलो तारपीन तेल और 17252 किलो बिरोजा बरामद
दिनांक : 2026-08-10 00:35:00
- रुहालकी गांव में देहरादून वन विभाग की टीम ने की कार्रवाई, स्टॉक व उत्पादन का लेखा-जोखा नहीं मिलने पर तैयार माल सील; चीड़ की लकड़ी की आपूर्ति और फैक्ट्री संचालन को लेकर जांच शुरू
भगवानपुर। देहरादून वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को भगवानपुर क्षेत्र के रुहालकी गांव में एक फैक्ट्री पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में तैयार तारपीन का तेल और बिरोजा बरामद किया। मौके पर फैक्ट्री प्रबंधन से संबंधित कोई जिम्मेदार अधिकारी या मालिक मौजूद नहीं मिला। टीम को मिले चार कर्मचारियों से फैक्ट्री में मौजूद माल और उत्पादन से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे कोई संतोषजनक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं करा सके। इसके बाद वन विभाग की टीम ने फैक्ट्री में मौजूद तैयार माल को सील कर दिया।
करीब 32 हजार किलो तैयार माल मिला
एसडीओ उदय गौड़ के अनुसार, छापेमारी के दौरान फैक्ट्री में करीब 14,900 किलो तैयार तारपीन का तेल और 17,252 किलो बिरोजा बरामद हुआ। विभाग के मुताबिक मौके पर मौजूद तैयार माल के संबंध में कोई संतोषजनक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया जा सका। इसी के चलते विभाग ने माल को सील करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
चीड़ की लकड़ी कहां से पहुंच रही थी, जांच का अहम बिंदु
वन विभाग अब इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि फैक्ट्री में चीड़ की लकड़ी अथवा लीसा किस माध्यम से पहुंच रहा था। विभाग यह भी पता लगाने में जुटा है कि अब तक कितनी मात्रा में कच्चा माल फैक्ट्री तक पहुंचा और उससे कितना तारपीन का तेल एवं बिरोजा तैयार किया गया।
एसडीओ उदय गौड़ ने बताया कि जांच में यदि निर्धारित मात्रा से अधिक स्टॉक या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो कंपनी स्वामी एवं संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
लाइसेंस वैध था तो स्टॉक का हिसाब क्यों नहीं मिला?
छापेमारी के बाद फैक्ट्री के संचालन को लेकर कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। अहम सवाल यह है कि फैक्ट्री कब से संचालित हो रही थी और यदि कंपनी के पास वैध लाइसेंस था तो मौके पर स्टॉक एवं उत्पादन का समुचित लेखा-जोखा क्यों उपलब्ध नहीं था। अब वन विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि फैक्ट्री में उत्पादन किस स्तर पर हो रहा था और वहां मौजूद माल के संबंध में वास्तविक स्थिति क्या है।
स्थानीय वन विभाग की कार्यशैली पर भी उठे सवाल
देहरादून वन विभाग की टीम द्वारा भगवानपुर क्षेत्र में इतनी बड़ी मात्रा में तैयार तारपीन का तेल और बिरोजा बरामद किए जाने के बाद स्थानीय वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में लंबे समय से फैक्ट्री का संचालन और बड़ी मात्रा में कच्चे माल से उत्पादन हो रहा था तो स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई, यह भी जांच का विषय बन गया है।
हालांकि, स्थानीय वन विभाग की लापरवाही या किसी अन्य स्तर पर चूक हुई है, इसका निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल देहरादून वन विभाग की कार्रवाई के बाद फैक्ट्री में मौजूद तैयार माल को सील कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
