80’s रेट्रो फोटो ट्रेंड के बहाने साइबर ठगी का खतरा, फर्जी ऐप और APK से रहें सावधान
दिनांक : 2026-09-13 14:15:00
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों अपनी मौजूदा तस्वीरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और फोटो एडिटिंग टूल्स की मदद से 1980 के दशक की पुरानी तस्वीर जैसा बनाने का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लोग अपनी तस्वीरों को रेट्रो लुक देकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। हालांकि, इस लोकप्रिय ट्रेंड को अब साइबर ठग भी लोगों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) ने लोगों को रेट्रो फोटो एडिटिंग के नाम पर प्रसारित किए जा रहे फर्जी विज्ञापनों, संदिग्ध लिंक और अनवेरिफाइड ऐप्स से सावधान रहने की सलाह दी है। साइबर ठग लोगों को मुफ्त या अनलिमिटेड रेट्रो फोटो एडिटिंग की सुविधा का लालच देकर संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और आधिकारिक ऐप स्टोर के बाहर से APK फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
फ्री रेट्रो फोटो के लालच में फंसाने की कोशिश
साइबर ठग सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन या संदेश प्रसारित कर रहे हैं। इनमें दावा किया जाता है कि किसी खास ऐप की मदद से सामान्य फोटो को कुछ ही सेकंड में 1980 के दशक के रेट्रो लुक में बदला जा सकता है।
यूजर जैसे ही ऐसे लिंक पर क्लिक करता है, उसे कई बार किसी वेबसाइट से APK फाइल डाउनलोड कर ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यही इस तरह की ठगी का सबसे बड़ा खतरा है, क्योंकि अनजान स्रोत से डाउनलोड किए गए ऐप में मालवेयर या अन्य हानिकारक सॉफ्टवेयर छिपा हो सकता है।
ऐप इंस्टॉल करते ही निजी डेटा पर खतरा
संदिग्ध ऐप इंस्टॉल करने के बाद वह जरूरत से ज्यादा परमिशन मांग सकता है। इन परमिशन के जरिए साइबर अपराधी फोन में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसमें SMS और OTP, कॉन्टैक्ट्स, नोटिफिकेशन, निजी जानकारी, डिवाइस डेटा और वित्तीय जानकारी शामिल हो सकती है। यानी महज एक फोटो को रेट्रो लुक देने के लालच में डाउनलोड किया गया फर्जी ऐप स्मार्टफोन में मौजूद महत्वपूर्ण जानकारियों को खतरे में डाल सकता है।
चोरी हुए डेटा का हो सकता है गलत इस्तेमाल
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यदि संवेदनशील जानकारी साइबर अपराधियों के हाथ लग जाती है तो उसका इस्तेमाल आगे वित्तीय धोखाधड़ी, अनधिकृत लेनदेन, पहचान की चोरी और अन्य साइबर अपराधों के लिए किया जा सकता है। ऐसे में किसी भी वायरल ट्रेंड से जुड़े ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके स्रोत और डेवलपर की विश्वसनीयता की जांच करना बेहद जरूरी है।
इन सावधानियों को न करें नजरअंदाज
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और एजेंसियों की सलाह है कि रेट्रो फोटो या किसी अन्य AI ट्रेंड से जुड़े ऐप को डाउनलोड करते समय विशेष सावधानी बरतें।
- SMS, WhatsApp या सोशल मीडिया पर मिले अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- किसी अनवेरिफाइड वेबसाइट से APK फाइल डाउनलोड न करें।
- ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसके डेवलपर और स्रोत की जांच करें।
- फोटो एडिटिंग ऐप को जरूरत से ज्यादा परमिशन देने से बचें।
- ऐसे ऐप से सावधान रहें जो अनावश्यक रूप से SMS, कॉन्टैक्ट्स या नोटिफिकेशन की अनुमति मांगते हैं।
- बैंकिंग, OTP या अन्य संवेदनशील जानकारी मांगने वाले संदिग्ध ऐप से तुरंत दूरी बनाएं।
- संभव हो तो ऐप हमेशा आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
ट्रेंड नहीं, फर्जी ऐप असली खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि 1980 के दशक का रेट्रो फोटो ट्रेंड अपने आप में कोई साइबर खतरा नहीं है। असली समस्या तब पैदा होती है जब साइबर अपराधी लोकप्रिय ट्रेंड का फायदा उठाकर लोगों को फर्जी ऐप, संदिग्ध वेबसाइट या मालवेयर वाली APK फाइल डाउनलोड करने के लिए उकसाते हैं।
इसलिए यदि आप भी अपनी तस्वीर को रेट्रो लुक देना चाहते हैं तो किसी अनजान लिंक या सोशल मीडिया विज्ञापन के जरिए ऐप डाउनलोड करने के बजाय भरोसेमंद और आधिकारिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें। एक छोटी सी लापरवाही आपकी निजी तस्वीरों के साथ-साथ फोन में मौजूद संवेदनशील डेटा को भी जोखिम में डाल सकती है।
