गैरसैंण नहीं तो शांति नहीं, 13 को सामूहिक मुंडन; 15 से गैरसैंण पदयात्रा

गैरसैंण नहीं तो शांति नहीं, 13 को सामूहिक मुंडन; 15 से गैरसैंण पदयात्रा

दिनांक : 2026-08-11 18:34:00

-100 दिन से अधिक के क्रमिक अनशन के बाद आंदोलनकारियों ने किया आर-पार की लड़ाई का ऐलान

देहरादून। गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर आंदोलन एक बार फिर उग्र होने जा रहा है। स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए 13 अगस्त को विधानसभा के बाहर सामूहिक मुंडन और 15 अगस्त से देहरादून से गैरसैंण तक महा-पदयात्रा शुरू करने की घोषणा की है।

समिति के मुताबिक, 13 अगस्त को सुबह नौ बजे विधानसभा के बाहर सामूहिक मुंडन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस के दिन 15 अगस्त को सुबह 9:30 बजे विधानसभा के बाहर से देहरादून-गैरसैंण पदयात्रा का शंखनाद किया जाएगा। समिति ने इसे गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किए जाने तक चलने वाले आंदोलन की नई शुरुआत बताया है।

समिति का कहना है कि वह दिल्ली, देहरादून, कर्णप्रयाग, चौखुटिया और रुद्रप्रयाग में प्रदर्शन कर चुकी है। वहीं देहरादून धरनास्थल पर 100 से अधिक दिनों से क्रमिक अनशन भी चल रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार लगातार गैरसैंण के मुद्दे पर जनता को आश्वासन देती रही, लेकिन स्थायी राजधानी को लेकर कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया।

समिति के मुख्य संयोजक एवं पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतूड़ी, पार्थ रतूड़ी, गोपाल दत्त कुमेड़ी, सुधीर गैरोला और शैलेंद्र शेखर करगेती ने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अब सरकार को समय टालने या आंदोलनकारियों को इंतजार कराने से काम नहीं चलेगा।

अब आर-पार की लड़ाई

समिति पदाधिकारियों ने कहा कि गैरसैंण केवल राजधानी का सवाल नहीं बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और भावी पीढ़ियों के अधिकार से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को कमजोर करने अथवा समय के साथ खत्म होने की उम्मीद सरकार न करे। आंदोलनकारियों ने कहा कि 13 अगस्त का सामूहिक मुंडन सरकार के प्रति रोष और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के संकल्प का प्रतीक होगा। वहीं 15 अगस्त से शुरू होने वाली पदयात्रा को आंदोलन का बड़ा जनसंपर्क अभियान बताया गया है। समिति ने स्पष्ट किया कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किए जाने तक आंदोलन को अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा।

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