दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया बरी, कोर्ट ने कहा- ठोस सबूत नहीं
दिनांक : 2026-02-27 17:11:00
दिल्ली : राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सभी आरोपों से बरी (discharged) कर दिया है।
कोर्ट का फैसला
27 फरवरी 2026 को विशेष सीबीआई अदालत (राउज एवेन्यू कोर्ट) ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष (सीबीआई) द्वारा आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि केजरीवाल और सिसोदिया के खिलाफ कोई ठोस, विश्वसनीय या पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किया गया। किसी आपराधिक षड्यंत्र या भ्रष्टाचार का कोई प्रमाण सामने नहीं आया। कोर्ट ने कहा, “अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में असफल रहा है। निष्पक्ष सुनवाई के लिए निष्पक्ष जांच अनिवार्य है, लेकिन यहां जांच में गंभीर खामियां पाई गईं।”
कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
- सुनवाई के दौरान जज ने चार्जशीट में कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया।
- गवाह संख्या 5 और 6 के बयान आपस में मेल नहीं खाते और सीबीआई द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज चार्जशीट से सामंजस्य नहीं रखते।
- अदालत ने “साउथ ग्रुप” और “साउथ लॉबी” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। जज ने पूछा कि इन शब्दों की उत्पत्ति क्या है और जांच में ऐसी सामूहिक, अस्पष्ट शब्दावली का प्रयोग उचित है या नहीं? कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे शब्द जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं।
- कोर्ट ने नाराजगी जताई कि कन्फेशनल स्टेटमेंट की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि शुरुआत से इसकी मांग की जा रही थी। सीबीआई ने बताया कि बयान सील कवर में जमा किया गया था, जिस पर अदालत ने असंतोष व्यक्त किया।
- जज ने कहा, “कभी-कभी फाइल को अधिक पढ़ने पर वही फाइल कई सवाल खड़े कर देती है।”
ये था पूरा आमला
दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 से जुड़े इस मामले में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि नीति में संशोधन कर कुछ निजी शराब कंपनियों (कथित “साउथ लॉबी”) को फायदा पहुंचाया गया और बदले में रिश्वत ली गई। आरोपों में 100 करोड़ रुपये की रिश्वत का दावा शामिल था, जो कथित तौर पर आम आदमी पार्टी (आप) के चुनावी खर्च के लिए इस्तेमाल हुई।
सीबीआई ने 2022 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी और बाद में कई सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश कीं। इसमें केजरीवाल, सिसोदिया सहित 23 लोग आरोपी थे। यह मामला लंबे समय से राजनीतिक विवाद का केंद्र रहा है। दोनों नेताओं ने आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था। अदालत ने चार्ज फ्रेमिंग पर सुनवाई पूरी करने के बाद 27 फरवरी को यह आदेश जारी किया।

