गढ़वाल विवि की डॉ. दीप्ति सेमवाल को मिला ‘यंग साइंटिस्ट अवार्ड’

गढ़वाल विवि की डॉ. दीप्ति सेमवाल को मिला ‘यंग साइंटिस्ट अवार्ड’

दिनांक : 2026-10-30 19:48:00

देहरादून : उत्तराखण्ड की युवा शोधकर्ता डॉ. दीप्ति सेमवाल ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी उपलब्धि से प्रदेश का मान बढ़ाया है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत डॉ. सेमवाल को 21वें उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) में यंग साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार जैव विविधता संरक्षण से जुड़े विषय पर उत्कृष्ट शोध प्रस्तुति के लिए प्रदान किया गया।
 
जैव विविधता संरक्षण पर शोध के लिए मिला सम्मान
उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से 25 और 26 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस सम्मेलन में डॉ. दीप्ति सेमवाल ने पृथ्वी विज्ञान संकाय के अंतर्गत अपना शोध प्रस्तुत किया। उनके शोध का विषय “जैविक संसाधनों का स्थानिक वितरण एवं सामुदायिक सहभागिता” रहा। इस विषय के माध्यम से जैविक संसाधनों के वितरण और उनके संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।
 
सम्मेलन में पृथ्वी विज्ञान संकाय के अंतर्गत भूगोल, भूविज्ञान, भू-आकृति विज्ञान, हिमनद भू-आकृति विज्ञान और भूभौतिकी सहित विभिन्न विषयों के शोधार्थियों ने भाग लिया। इन विषयों के बीच अपनी शोध प्रस्तुति के लिए सम्मान हासिल करना डॉ. सेमवाल की उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
 
गढ़वाल विश्वविद्यालय से पूरी की पीएचडी
डॉ. दीप्ति सेमवाल ने भूगोल विषय में अपनी पीएचडी हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से पूरी की है। उनका शोध बायोजियोग्राफी के क्षेत्र से संबंधित रहा, जिसका शीर्षक “Biogeographical Regionalization of Garhwal Region” था। उन्होंने यह शोध प्रोफेसर मोहन सिंह पंवार के मार्गदर्शन में पूरा किया।
 
डॉ. सेमवाल मूल रूप से उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले के दूरस्थ गांव उथिंड की निवासी हैं। सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों से निकलकर शोध एवं अकादमिक क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करना उनकी उपलब्धि को खास बनाता है।
 
प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के पैनल ने किया शोध प्रस्तुतियों का मूल्यांकन
21वें उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन में शोध पत्रों के मूल्यांकन के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया था। विशेषज्ञ पैनल में प्रोफेसर हरीश कर्नाटक, प्रोफेसर कमल पांडे, जो आईआईआरएस-इसरो से जुड़े वैज्ञानिक हैं, तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक शामिल थे।
 
विशेषज्ञों ने सम्मेलन में प्रस्तुत शोध कार्यों का मूल्यांकन किया। इस प्रक्रिया के माध्यम से विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
 
सम्मेलन में 261 शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
इस वर्ष आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में शोध एवं वैज्ञानिक अनुसंधान को लेकर प्रतिभागियों का उत्साह देखने को मिला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सम्मेलन की सभी श्रेणियों में कुल 261 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इनमें 165 महिला और 96 पुरुष शोधार्थी शामिल रहे।
 
सम्मेलन के दौरान विभिन्न श्रेणियों में कुल 36 यंग साइंटिस्ट अवार्ड प्रदान किए गए। इनमें 16 महिला और 20 पुरुष शोधार्थियों को उनके उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
 
उत्तराखण्ड के युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा
डॉ. दीप्ति सेमवाल को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत शोध प्रयासों की उपलब्धि है, बल्कि उत्तराखंड में विज्ञान, पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे अनुसंधान को भी प्रोत्साहित करता है। पर्वतीय क्षेत्रों में जैविक संसाधनों का संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे विषय वर्तमान समय में विशेष महत्व रखते हैं।
 
उनकी इस उपलब्धि से युवा शोधार्थियों, खासकर महिला शोधकर्ताओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने और समाज व पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर शोध करने की प्रेरणा मिलेगी।

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