गैरसैंण में बजट सत्र, सरकार का पर्वतीय विकास और जनकल्याण पर फोकस
दिनांक : 2026-10-30 19:35:00
भराड़ीसैंण : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में आज से विधानसभा सत्र शुरू हो गया है। इसके साथ ही उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में पहली बार एक वर्ष के भीतर दो विधानसभा सत्र आयोजित होने का नया अध्याय जुड़ गया है। इससे पहले मार्च 2026 में यहां बजट सत्र आयोजित किया गया था। अक्टूबर में आयोजित हो रहे इस सत्र के साथ गैरसैंण राज्य की विधायी गतिविधियों के केंद्र में एक बार फिर है।
गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इसके बाद अलग-अलग वर्षों में यहां विधानसभा की कार्यवाही संचालित होती रही है। वर्ष 2019 और 2022 में यहां कोई सत्र आयोजित नहीं हुआ, जबकि वर्ष 2025 में बजट और मानसून सत्र आयोजित किए गए। वर्ष 2026 में मार्च के बजट सत्र के बाद अक्टूबर में दूसरी बार सत्र आयोजित किया जा रहा है। गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का आयोजन पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, स्थानीय जनभावनाओं और विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गैरसैंण उत्तराखण्ड की जनभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। सरकार का प्रयास है कि भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्रों के आयोजन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, जनअपेक्षाओं और विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता मिले। उन्होंने कहा कि सरकार जनभावनाओं के अनुरूप विकास और सुशासन के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
₹7,844 करोड़ का अनुपूरक बजट, विकास और जनकल्याण पर विशेष ध्यान
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने ₹7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट प्रस्तावित किया है। इसमें ₹4,164.32 करोड़ पूंजीगत मद और ₹3,679.86 करोड़ राजस्व मद में रखे गए हैं। अनुपूरक बजट जुड़ने के बाद राज्य के मूल बजट ₹1,11,703.21 करोड़ का कुल आकार बढ़कर ₹1,19,547.39 करोड़ हो जाएगा।
बजट में बुनियादी ढांचे, स्थानीय निकायों, कृषि, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, महिला एवं बाल कल्याण तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था की गई है। सरकार का उद्देश्य विकास योजनाओं को गति देने के साथ-साथ उनका लाभ आम जनता तक पहुंचाना है।
स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार राज्य के कर राजस्व में उनकी हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए ₹721 करोड़ की व्यवस्था की गई है। इससे ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों को विकास कार्यों तथा स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
आधारभूत ढांचे के विकास के लिए विशेष सहायता योजना (SASCI) के अंतर्गत ₹500 करोड़ प्रस्तावित हैं। ऊर्जा क्षेत्र में खुरपिया फार्म परियोजना सहित पारेषण और वितरण व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न मदों में लगभग ₹270 करोड़ रखे गए हैं। शहरी विकास विभाग की एशियाई विकास बैंक से पोषित योजनाओं के लिए लगभग ₹100 करोड़, पुलिस विभाग के भवनों के निर्माण के लिए ₹55 करोड़, न्यायिक अवसंरचना के लिए ₹22 करोड़ तथा पंचायत भवनों के निर्माण के लिए ₹5 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़कों के अनुरक्षण सहित लोक निर्माण विभाग के लिए ₹31 करोड़ और ग्राम्य विकास विभाग के लिए ₹30 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। इन प्रावधानों से प्रदेश में सड़क, भवन और अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता
अनुपूरक बजट में किसानों, कृषि आधारित गतिविधियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विशेष महत्व दिया गया है। अन्नपूर्ति योजना के अंतर्गत किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए ₹1,100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही जलवायु अनुकूल कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता और वैकल्पिक आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी धनराशि प्रस्तावित की गई है।
उत्तराखण्ड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना (जायका) के लिए ₹70 करोड़ रखे गए हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के लिए लगभग ₹35 करोड़ तथा दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए ₹20 करोड़ का प्रावधान किया गया है। किसान पेंशन योजना के लिए ₹9 करोड़ प्रस्तावित हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका के वैकल्पिक साधनों को बढ़ावा देने के लिए ट्राउट प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत लगभग ₹28 करोड़ और नई मौन पालन नीति के लिए ₹1 करोड़ रखे गए हैं। इसके अतिरिक्त गौ सदनों के निर्माण के लिए लगभग ₹9 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से कृषि उपज की खरीद के साथ कृषि आधारित छोटे उद्यमों, सहकारिता और वैकल्पिक रोजगार गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है।
कुंभ, नंदा राजजात और पेयजल परियोजनाओं के लिए धनराशि
अनुपूरक बजट में धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की यात्राओं और आयोजनों से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी स्थान दिया गया है। आगामी दिव्य कुंभ की व्यवस्थाओं तथा अवस्थापना सुविधाओं के लिए विभिन्न अनुदानों के अंतर्गत समग्र रूप से लगभग ₹290 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं।
हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत कार्यों के लिए पूंजीगत मद में ₹30 करोड़ तथा नंदा राजजात यात्रा के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए ₹20 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से संबंधित आवश्यक सुविधाओं के विकास को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
पेयजल व्यवस्था के लिए गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के अंतर्गत ₹122 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। जल जीवन मिशन में ठेकेदारों के बकाया भुगतान सहित अन्य आवश्यकताओं के लिए ₹300 करोड़ तथा पेयजल विभाग की केएफडब्ल्यू परियोजना के लिए लगभग ₹110 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
आपदा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में भी आवश्यक कार्यों के लिए बजट में धनराशि रखी गई है। ज्योर्तिमठ और अन्य भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक कार्यों के लिए लगभग ₹48 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। इसके साथ ही आपदा रोधी निर्माण और सुरक्षित अवस्थापना के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार
स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अटल आयुष्मान योजना में ₹100 करोड़ और राज्य कर्मचारियों की गोल्डन कार्ड योजना में ₹125 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन दोनों योजनाओं के लिए कुल ₹225 करोड़ प्रस्तावित हैं। अटल आयुष्मान योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, जबकि गोल्डन कार्ड योजना राज्य कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करती है।
चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज सहित नर्सिंग कॉलेजों से संबंधित कार्यों के लिए पूंजीगत मद में लगभग ₹160 करोड़ रखे गए हैं। इससे चिकित्सा शिक्षा से जुड़ी अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
विद्यालयी और उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग के विस्तार के लिए ₹200 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों को NEET, JEE और CLAT जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग देने के लिए ₹5 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
युवाओं, खिलाड़ियों और महिलाओं के लिए योजनाएं
युवाओं को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए अनुपूरक बजट में खेल विश्वविद्यालय के लिए लगभग ₹35 करोड़, चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए ₹10 करोड़ और खिलाड़ियों के विशेष प्रशिक्षण शिविरों के लिए ₹8 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। खिलाड़ियों की छात्रवृत्ति के लिए लगभग ₹5.50 करोड़ तथा ओपन जिम की स्थापना के लिए ₹5 करोड़ का प्रावधान भी किया गया है।
महिला एवं बाल कल्याण तथा पोषण संबंधी योजनाओं को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0-पोषण अभियान के अंतर्गत लगभग ₹60 करोड़ और भोजन माताओं के मानदेय के लिए ₹20 करोड़ प्रस्तावित हैं। निराश्रित विधवा पेंशन के लिए लगभग ₹27 करोड़, विभिन्न कल्याणकारी पेंशन योजनाओं के लिए लगभग ₹93 करोड़, मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के लिए ₹2 करोड़ तथा मुख्यमंत्री बाल सानिध्य योजना के लिए ₹1 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
इन व्यवस्थाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, खेल सुविधाओं, पोषण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
विकास के साथ सुशासन और जनभागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार का संकल्प उत्तराखण्ड को वर्ष 2047 तक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाना है। इसके लिए सरकार विकास कार्यों को गति देने के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
सरकार ने बजट निर्माण में जनभागीदारी को भी महत्व दिया है। पिछले पांच वर्षों में बजट पूर्व संवाद के माध्यम से किसानों, महिलाओं, युवाओं, उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त किए गए। वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग पर जोर देते हुए राजस्व अधिशेष की स्थिति बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
राज्य में पहली बार देहरादून में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया का परिसर स्थापित किए जाने को भी आईटी और स्टार्टअप क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसरों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन, सुरक्षित अवस्थापना, स्थानीय रोजगार, गुणवत्तापूर्ण निवेश और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की उपलब्धियां प्रदेशवासियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं। सरकार की प्राथमिकता केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना है। विकसित उत्तराखण्ड का निर्माण जनभागीदारी, सुशासन और निरंतर विकास से ही संभव होगा।
इस प्रकार गैरसैंण में एक वर्ष के भीतर दो विधानसभा सत्रों का आयोजन और ₹7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट प्रदेश की विधायी गतिविधियों, विकास योजनाओं तथा जनकल्याणकारी प्राथमिकताओं को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं।
