धामी सरकार की योजनाओं से बदली तस्वीर, सेब-कीवी की बागवानी से हर सीजन में 4 लाख तक की अतिरिक्त आय, पौड़ी के दीनदयाल बिष्ट बने आत्मनिर्भरता की मिसाल

धामी सरकार की योजनाओं से बदली तस्वीर, सेब-कीवी की बागवानी से हर सीजन में 4 लाख तक की अतिरिक्त आय, पौड़ी के दीनदयाल बिष्ट बने आत्मनिर्भरता की मिसाल

दिनांक : 2026-08-02 01:07:00

  • मुख्यमंत्री धामी की योजनाओं से बदली तस्वीर, सेब और कीवी की बागवानी से आत्मनिर्भर बने दीनदयाल बिष्ट
  • सरकारी योजनाओं और आधुनिक बागवानी के समन्वय से हर सीजन में 3 से 4 लाख रुपये की अतिरिक्त आय

पौड़ी गढ़वाल। पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन और सीमित रोजगार की चुनौती के बीच उत्तराखंड में बागवानी स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित किसान हितैषी एवं बागवानी योजनाओं का लाभ उठाकर कई किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड थलीसैंण के सुकई (बंज्वाड़) गांव निवासी एवं राजकीय इंटर कॉलेज बैंजरो में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता दीनदयाल बिष्ट इसकी प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आए हैं।

कोविड काल में लिया फैसला, अनुपयोगी भूमि को बनाया आय का जरिया

कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान दीनदयाल बिष्ट ने गांव की अनुपयोगी भूमि का सदुपयोग करने का निर्णय लिया। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए सेब और कीवी की बागवानी शुरू की। एक छोटे स्तर से शुरू हुआ यह प्रयास आज सफल उद्यम का रूप ले चुका है और उनकी नियमित आय के साथ अतिरिक्त आमदनी का भी मजबूत स्रोत बन गया है।

सरकारी योजनाओं से मिली मजबूती

बागवानी परियोजना को सफल बनाने में विभिन्न सरकारी योजनाओं ने अहम भूमिका निभाई। मनरेगा के माध्यम से बाग की घेरबाड़ कराई गई, कृषि विभाग की सहायता से जियोटैंक एवं हाइड्रो प्रोजेक्ट पाइपलाइन के जरिए सिंचाई व्यवस्था विकसित की गई। वहीं उद्यान विभाग ने पौध चयन, पौधरोपण, रखरखाव और वैज्ञानिक प्रबंधन संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया। इन प्रयासों से उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

हर सीजन में 3 से 4 लाख रुपये की अतिरिक्त आय

दीनदयाल बिष्ट आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक बागवानी के माध्यम से प्रत्येक सीजन में लगभग तीन से चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में भी आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं के समुचित उपयोग से बागवानी लाभकारी एवं टिकाऊ स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बन सकती है।

किसानों को मिल रहा तकनीकी सहयोग

जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी ने बताया कि जनपद में सेब, कीवी सहित उच्च मूल्य वाली फल बागवानी को बढ़ावा देने के लिए किसानों को तकनीकी परामर्श, प्रशिक्षण और विभागीय योजनाओं के माध्यम से आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु इन फसलों के लिए अत्यंत अनुकूल है और किसान वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं।

आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को मिल रही मजबूती

दीनदयाल बिष्ट की सफलता राज्य सरकार के ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के संकल्प को मजबूती देने वाला उदाहरण है। उनकी उपलब्धि प्रदेश के युवाओं और किसानों को यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और निरंतर मेहनत के बल पर गांव में रहकर भी सम्मानजनक आय अर्जित की जा सकती है। यह मॉडल न केवल आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रहा है, बल्कि पलायन जैसी चुनौती को अवसर में बदलने की नई प्रेरणा भी दे रहा है।

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