चमोली : भटियाणा गांव से निकली तपोवन की खुशबू, नंदी देवी ने अगरबत्ती-धूपबत्ती के कारोबार से रचा आत्मनिर्भरता का मॉडल

चमोली : भटियाणा गांव से निकली तपोवन की खुशबू, नंदी देवी ने अगरबत्ती-धूपबत्ती के कारोबार से रचा आत्मनिर्भरता का मॉडल

दिनांक : 2026-08-20 19:54:00

  • खुशबू ऐसी कि कारोबार महक उठा, नंदी देवी की अगरबत्ती से 1 लाख की उड़ान

गोपेश्वर (चमोली)। पहाड़ के एक छोटे से गांव में शुरू हुआ अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाने का काम आज नंदी देवी के लिए आत्मनिर्भरता की पहचान बन चुका है। विकासखंड थराली की ग्राम पंचायत भटियाणा निवासी नंदी देवी ने नवंबर 2020 में सीमित संसाधनों के साथ यह काम शुरू किया था। मेहनत, बाजार की समझ और सरकारी सहयोग से उनका छोटा-सा प्रयास आज तपोवन ब्रांड के रूप में पहचान बना चुका है और कारोबार करीब एक लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गया है।

नंदी देवी की कहानी केवल एक महिला के सफल कारोबार की कहानी नहीं, बल्कि यह भी बताती है कि पहाड़ में स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर मिलने पर महिलाएं अपने घर और गांव में रहकर आर्थिक रूप से मजबूत हो सकती हैं। ग्रामोत्थान परियोजना (रीप), जय मां भवानी स्वयं सहायता समूह और आस्था महिला आजीविका स्वायत्त सहकारिता, कुलसारी से जुड़ने के बाद नंदी देवी को अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग मिला।

शुरुआती दौर में कच्चा माल जुटाना, उत्पाद तैयार करना, गुणवत्ता बनाए रखना और बाजार तलाशना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन नंदी देवी ने धीरे-धीरे बाजार की जरूरत को समझा और अपने उत्पादों की गुणवत्ता तथा सुगंध पर विशेष ध्यान दिया। ग्राहकों का भरोसा बढ़ा तो मांग भी बढ़ने लगी।

भटियाणा से शुरू हुआ तपोवन अब कुलसारी, थराली, देवाल, ग्वालदम, नारायणबगड़, कर्णप्रयाग, पौड़ी, देहरादून और ऋषिकेश तक पहुंच चुका है। यानी गांव में तैयार होने वाली अगरबत्ती और धूपबत्ती अब पहाड़ के कई बाजारों में अपनी खुशबू बिखेर रही है।

व्यवसाय को विस्तार देने में ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) की भूमिका भी अहम रही। वर्ष 2024 में नंदी देवी को परियोजना के तहत 75 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली। इसके अलावा उन्होंने कारोबार बढ़ाने के लिए 1.50 लाख रुपये का ऋण लिया। इस राशि से कच्चा माल जुटाने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार का दायरा बढ़ाने में मदद मिली। सबसे खास बात यह है कि नंदी देवी ने अपने उद्यम को सिर्फ अपने परिवार तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने गांव की दूसरी महिलाओं को भी काम से जोड़ा। वर्तमान में रोशनी जोशी, रेखा देवी, बुदली देवी समेत 4-5 ग्रामीण महिलाएं उनके साथ अगरबत्ती और धूपबत्ती निर्माण में काम कर रही हैं। इससे महिलाओं को गांव में ही रोजगार और आय का अवसर मिल रहा है।

नंदी देवी के बेटे पंकज भी कारोबार बढ़ाने में उनका सहयोग कर रहे हैं। बाजार से संपर्क बढ़ाने और उत्पादों की बिक्री को नए क्षेत्रों तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। परिवार के सहयोग और नंदी देवी की मेहनत ने घर से शुरू हुए काम को व्यवसाय का रूप दे दिया।

नंदी देवी कहती हैं कि यदि किसी महिला को सही अवसर, मार्गदर्शन और थोड़ा सहयोग मिले तो वह अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। उनके मुताबिक स्वयं सहायता समूह और ग्रामोत्थान परियोजना से मिले सहयोग ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से मजबूत किया, बल्कि कारोबार को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी दिया।

अब नंदी देवी की नजर उत्तराखंड से बाहर के बाजार पर है। वह तपोवन को देश के अन्य राज्यों तक पहुंचाना चाहती हैं और अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखती हैं।

भटियाणा गांव से निकली नंदी देवी की यह कहानी बताती है कि पहाड़ में अवसर सीमित हो सकते हैं, लेकिन हुनर, मेहनत और सही सहयोग मिले तो गांव से भी कारोबार की खुशबू दूर तक पहुंचाई जा सकती है।

Admin