देवभूमि के पर्यटन को नई रफ्तार देने के लिए शासन की ओर से गठित संयुक्त टीम ने विश्व प्रसिद्ध जोशीमठ-औली रोपवे का किया सघन निरीक्षण
दिनांक : 2026-01-28 17:09:00
ज्योतिर्मठ। देवभूमि के पर्यटन को नई रफ्तार देने के लिए शासन की ओर से गठित संयुक्त टीम ने बुधवार को विश्व प्रसिद्ध जोशीमठ-औली रोपवे का सघन निरीक्षण किया। इस टीम में पर्यटन विभाग, ब्रिडकुल , गढ़वाल मंडल विकास निगम और तहसील प्रशासन के आला अधिकारी शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान टीम ने जोशीमठ स्थित टावर नंबर 1 से लेकर औली के टावर नंबर 10 तक का स्थलीय जायजा लिया। अधिकारियों ने न केवल दोनों स्टेशनों की तकनीकी स्थिति को बारीकी से परखा, बल्कि रोपवे मार्ग के आसपास भू-धंसाव से पड़ी दरारों का भी व्यापक आकलन किया। गौरतलब है कि 5 जनवरी 2023 को जोशीमठ में आई भू-धंसाव की आपदा के बाद सुरक्षा कारणों से इस रोपवे को बंद कर दिया गया था, जिससे यहाँ के पर्यटन व्यवसाय पर गहरा असर पड़ा था।
स्थानीय निवासियों और पर्यटन व्यवसायियों की ओर से रोपवे को पुनः सुचारु करने की लगातार उठ रही मांग के बाद पर्यटन सचिव की अध्यक्षता में इस टीम का गठन किया गया है। टीम की यह रिपोर्ट अब शासन को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर एशिया के सबसे लंबे रोपवे में शुमार इस ट्रैक के भविष्य पर निर्णय लिया जाएगा।
क्या है इस रोपवे की विशेषता
- एशिया का गौरव: यह रोपवे लगभग 4.15 किलोमीटर लंबा है, जिसे एशिया के सबसे लंबे और ऊंचे रोपवे में गिना जाता है।
- समय की बचत: जहाँ सड़क मार्ग से जोशीमठ से औली पहुँचने में काफी समय लगता है, वहीं यह रोपवे मात्र 20-25 मिनट में यह सफर तय करा देता है।
- खूबसूरत नजारा: यह पर्यटकों को नंदा देवी, कामेट और द्रोणागिरी जैसी विशाल हिमालयी चोटियों के विहंगम दृश्य दिखाता है.
- अर्थव्यवस्था की रीढ़: सर्दियों में औली आने वाले स्कीइंग प्रेमियों के लिए यह आवागमन का सबसे मुख्य और पसंदीदा साधन है।
निरीक्षण के दौरान के जीएम लक्ष्मी राज चौहान, आरएम विश्वनाथ बेंजवाल, तहसीलदार महेंद्र कुमार, ब्रिडकुल के दीपक खंडूरी सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।

