उत्तराखण्ड में तंबाकू-गुटखा पर बैन को लेकर व्यापारियों ने मांगा समय

उत्तराखण्ड में तंबाकू-गुटखा पर बैन को लेकर व्यापारियों ने मांगा समय

दिनांक : 2026-10-16 00:18:00

देहरादून : उत्तराखण्ड सरकार ने जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा, पान मसाला और अन्य संबंधित खाद्य उत्पादों पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध 13 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

 

14 अक्टूबर से शुरू हुई छापेमारी

आदेश जारी होने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने 14 अक्टूबर से प्रदेशभर में छापेमारी शुरू कर दी है। प्रतिबंध के तहत इन उत्पादों का निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री नहीं की जा सकती है। यह नियम केवल दुकानदारों पर ही नहीं, बल्कि थोक विक्रेताओं, वितरकों, गोदाम संचालकों और निर्माण इकाइयों पर भी लागू होगा।

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) और संबंधित विनियमों के तहत यह कार्रवाई की गई है। उत्पाद किसी भी नाम से बेचा जा रहा हो, यदि वह प्रतिबंध के दायरे में आता है, तो उसकी बिक्री नहीं की जा सकेगी।

 

दुकानदारों के सामने स्टॉक संभालने की चुनौती

प्रतिबंध लागू होने के बाद सबसे बड़ी समस्या दुकानदारों के सामने खड़ी हो गई है। कई छोटे किराना दुकानदारों और पान की दुकानों के पास पहले से ही गुटखा और पान मसाले का स्टॉक मौजूद है। अब वे इस सामान को बेच नहीं सकते हैं।

ऐसे में व्यापारी अपने बचे हुए स्टॉक को वापस लेने या उसके उचित प्रबंधन की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। इस फैसले का असर छोटे दुकानदारों के साथ-साथ थोक कारोबारियों और वितरकों पर भी पड़ सकता है।

 

पहले भी लग चुका है प्रतिबंध

उत्तराखंड में इससे पहले भी वर्ष 2013, 2015 और 2019 में ऐसे उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। हालांकि, इन उत्पादों की बिक्री पर पूरी तरह लगाम लगाना चुनौती बना रहा है। इस बार विभाग की ओर से छापेमारी और निगरानी के जरिए प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने की कोशिश की जा रही है।

 

सरकार को हर साल मिलता है करीब 40 करोड़ रुपये का GST

तंबाकू आधारित उत्पादों पर प्रतिबंध का असर कारोबार के साथ-साथ सरकारी राजस्व पर भी पड़ सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन उत्पादों से राज्य को हर साल करीब 40 करोड़ रुपये का GST मिलता है। इसमें लगभग 20 करोड़ रुपये राज्य सरकार और 20 करोड़ रुपये केंद्र सरकार के हिस्से में जाते हैं।

ऐसे में प्रतिबंध से खुदरा दुकानदारों के अलावा थोक विक्रेताओं, वितरकों, गोदाम संचालकों और आपूर्ति से जुड़े दूसरे कारोबारियों की कमाई पर भी असर पड़ने की संभावना है।

 

जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता, व्यापारियों को राहत का इंतजार

उत्तराखंड सरकार का यह फैसला तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रतिबंध लागू होने के बाद व्यापारियों के सामने पुराने स्टॉक और आर्थिक नुकसान की समस्या भी खड़ी हो गई है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि खाद्य सुरक्षा विभाग प्रतिबंध को लागू कराने के लिए आगे क्या कदम उठाता है और कारोबारियों के पास बचे हुए स्टॉक के प्रबंधन को लेकर क्या व्यवस्था की जाती है।

Admin